“तालाब में राहुल गांधी — मछली भी फंसी, बेगूसराय की राजनीति भी!”

अजमल शाह
अजमल शाह

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल अब पानी में उतर गया है — सचमुच! लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस बार पब्लिक कनेक्शन का ऐसा तरीका अपनाया कि कैमरे भी पानी में पसीना छोड़ दें। बेगूसराय के एक तालाब में राहुल गांधी अचानक स्थानीय मछुआरों के साथ मछली पकड़ने उतर गए।
ना कोई स्टेज, ना कोई स्पीच — सिर्फ जाल, पानी और जनता।

“नेता नहीं, मछुआरे निकले राहुल गांधी”

ग्रामीणों की भीड़ तब हैरान रह गई जब उन्होंने गांधी जी को जाल फेंकते और मछलियां पकड़ते देखा।
एक बुजुर्ग मछुआरे ने मुस्कुराते हुए कहा — “पहली बार देखा है कोई नेता हमारे तालाब में बिना सुरक्षा घेरे के उतर गया!”

इस पूरे कार्यक्रम में उनके साथ वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और कन्हैया कुमार भी मौजूद रहे। तीनों नेताओं ने तालाब में उतरकर एकता की जाल फेंक दी — कुछ मछलियां फंसीं, बाकी राजनीतिक संदेश ज़रूर तैर गया।

‘मिट्टी से जुड़ाव’ या चुनावी स्टंट?

राहुल का यह कदम बिहार की लोक संस्कृति और ग्राउंड पॉलिटिक्स से जुड़ाव का प्रतीक है। मुकेश सहनी और कन्हैया कुमार के साथ उतरना, महागठबंधन की एकता का ‘तालाबी प्रदर्शन’ माना जा रहा है।

बिहार की पॉलिटिक्स में ‘पानी-पानी’ मोमेंट

बाकी दल कन्फ्यूज हैं कि “ये प्रचार था या प्रतीक?”

जो भी हो, “तालाब में उतरे राहुल गांधी” वाला वीडियो अब बिहार चुनाव के पोस्टरों और व्हाट्सएप ग्रुप्स में तैर रहा है।

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